ऐ जिन्दगी
बता तेरी रजा क्या है...?
मौत तेरी सच्चाई है तो
फिर ये जुदाई क्या है..?
मौसम से तेरा कोई रिश्ता है तो बता
कभी बहार तो कभी तन्हाई क्यों है...?
कभी हँसने की जगह देते हो, कभी रोने की वजह
तेरी नजरो में मिलन और जुदाई क्या है..?
ऐ जिन्दगी बता तेरी रजा क्या है..?
(अपने अजीज मित्र के नाम)
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