लेखक : ओंकार
विश्वकर्मा
कविता अपने घर की एक ही
बेटी थी उसके माता पिता बड़े ही आधुनिक और प्रगतिशील सोच के थे इस लिए उन्हें जीवन
में और बच्चे की कल्पना नहीं की एक ही बेटी को पढ़ाने लिखाने और समाज में काबिल
बनाने की सोच उन्हें बेटी के उज्वल भविष्य की और ले गई! बेटी के आने से घर में
काफी ख़ुशी थी! पुर परिवार ख़ुशी मन रहा था! मनाता भी क्यों नहीं उन्हें गर्व था की
आज जिस समाज में बेटी को बोझ समझा जाता है उस समाज में वह बेटी के साथ खुश थे और
इस समाज के जाने अनजाने लाखो सवालो के जबाब अपने जुबान पर रखते थे! इस तरह बेटी 2
साल की हुई बेटी के हाथ में खिलौने का जगह मोबाईल ने ले लिया था! वह जब भी फ़ुर्सत
में होती अपना अधिक वक्त मोबाईल पर ही बिताती थी! अब वह पढने लगी थी अपने पढाई के
काम से फ़ुर्सत होने के बाद भी अपना अधिक वक्त मोबाईल पर ही बिताती थी! आखिर उसी
विज्ञानं ने मोबाईल बनाया था इन्सान के आम जरुरी वाली काम को सरल कर ने के लिए और
उसका एक बहुत ही प्रचलित नारा भी आया था कर लो दुनिया मुट्ठी में वास्तव में दुनिया कविता के मुट्ठी में थी! वो
अपनी हर जरुरत के सामान को मोबाईल में ही ढूंढा करती थी! वक्त धीरे धीरे आगे बढ़
रहा था और कविता भी वक्त के साथ बड़ी हो रही थी! इस तरह उसने अपनी स्नातक की पढाई
भी पूरी कर ली थी!
वर्तमान हालत और खबरों के
दौर ने उसके पिता को उलझा दिया था और उन्होंने अंतिम निर्णय लिया की क्यों न बेटी
के शादी कर दी जाए जिसके बाद वह आगे पढेगी! सिलसिला चलता रहा उसके पिता ने कविता
के लिए लड़का देखना प्रारम्भ किया पर कविता ने मना कर दी उसने कहा की हम इन्टरनेट
पर ढूंढ लेगी जिसके बाद
कविता ने जो कभी इन्सानी
दुनिया से अपना कोई वास्ता ही नहीं रखी थी उसे उसने सब कुछ वेब से ही सीखा था और
वेब से ही आगे सब कुछ करना चाहती थी उसने वेब पर ही अपने लिए पति भी ढूढ़ ली और
शादी हो गई! शादी के बाद दोनों के पास कभी वक्त ही नहीं था की वो आपस में एक दुसरे
से मिल बैठ कर बात करते वो पने काम वे वस्त रहता तो कविता भी अपने मोबाईल की
दुनिया में मशगुल रहती वक्त गुजरता गया!
इस गुजरते वक्त में जीवन के
लिए प्यार कितना जरुरी होता है यह एहसास जब एक दुसरे को सताने लगा तो दोनों
गलतफहमी की दौर से गुजरने लगे कविता को लगता की उसके पति के कई सारे गर्लफ्रेंड है
और वो उन्ही सब के साथ पूरा दिन व्यस्त रहते हैऔर उसके पति को लगता की उसके कई
सारे लोग संपर्क में जिससे वो पूरा दिन घर में बैठी बैठी फोन पर व्यस्त रहती है
फिर क्या था इसी मनमुटाव
में दोनों के बिच की गलतफहमी बढती गई और एक दुसरे पर सक करने लगे और सक धीरे धीरे
एक दुसरे की दुरी बढ़ने लगी दुरी इतना बढ़ गया की अब दोनों को एक दुसरे की कमी खलने
लगी फिर क्या था दोनों ने एक दुसरे को सबक सिखाने के लिए सोशल मिडिया पर कई सारे
दोस्त बनाये और फिर उनके साथ पार्टी और घूमना फिरना चलने लगा पर वह दोस्त तब तक
लिए थे जब तक उनके पास पैसा था कुछ ही दिनों में दोनों के दोस्ती के भुत उतर गए थे
और फिर एक दुसरे के पास आ गए पर सक की वो बुनियाद अपना काम बंद नहीं किया उनकी
गलतफहमी किस भी हालत में कम नहीं हुई! कविता के पति ऑफिस में अपने काम को ले कर
ऑनलाइन रहा करते तो कविता अपनी पढाई और एनी चीजो को ले कर ऑनलाइन रहती
अब इस विज्ञानं के चमत्कार
ने तो इस ग़लतफ़हमी का कोई इलाज ही नहीं निकाला था और हर चीज में सबूत पेस करना मनो
इनकी जिन्दगी वकालतखाना बन गई थी! इनका सक कम नहीं हो रहा था
इस वैज्ञानिक यंत्र ने तो
इनकी पूरी जिन्दगी को तबाह कर के रख दिया था और अंत में इनका विवाद इतना बढ़ गया की
बात तलक तक आ पहुची और अब ये दोनों कोर्ट के चक्कर लगा कर अपने जिदगी के 10 साल
गुजार दिए पर अब तक यह साबित नहीं कर पाए की दोषी कौन.?

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