भारत..! हा यह वही देश है जहाँ कई धर्म गुरु ने जन्म लिए और अपने अपने अंदाज से एक पंत का संचालन कर समाज को दिशा देने का काम किया है। और लगभग सभी ने अपने अपने स्तर से प्रेम और शांति को ही मूल मंत्र बताया है। पर क्या आज प्रेम और शांति कायम है.? क्या हम जिस तरह दुनिया के विश्व गुरु होने का दावा करते है हम उस काबिल है भी या नही..? यह एक आत्म मंथन का विषय है जो हर एक भारतीय को करना चाहिए। हम भारत के किसी विशेष पंत में रहते हु मानव को मानव से प्रेम करने की कला सीखते है पर जैसे ही प्रयोग करने पर बात आती है तो हमारी रूढ़िवादी मानसिकता आड़े आ जाती है और हमे अपने मर्दानगी का एहसास होने लगता है और अपने पुरखे याद आ जाते है जिसके बाद मेरा सीना 56 इंच का हो जाता है जिसके बाद हम उसका खुल कर विरोध करते है।
अगर हम भारत के किसी विशेष पंत में है तो मेरी मानसिकता है कि हम पवित्र है। भले ही हमारी मानसिकता कितनी भी गंदी क्यो न हो? और मेरी पवित्रता का संबद्ध यह है कि हम अपने घर मे कुत्ते के साथ खाना खा ले तो चलेगा पर किसी शुद्र अगर घर मे प्रवेश कर जाए तो पूरा घर गंगा जल छिड़क कर पवित्र करते है।
हम दुनिया से प्रेम करना सीखते है पर जब हमे प्रयोग करने की बारी आती है तो अपने ही घर मे किसी पुरुष के महिला मित्र (girlfriend) को इतनी गलत निगाह से देखते है मानो वह मेरे घर के मर्द को अपने पल्लू में बांध ली हो। चाहे वह महिला को आपके घर पुरुष सम्मान और आदर्श के तौर पर क्यों न मानते हो।
इस मामले में हमारे समाज का नजरिया बिल्कुल संकीर्ण है।
हमारे समाज मे गर्लफ्रैंड होने का अर्थ बस इतना है कि वह उसके साथ प्रेम करता है और उसके अपने शारिरिक संबंध है। पर देखा जाए तो गर्लफ्रैंड एक अंग्रेजी शब्द है वह किसी भी पुरुष और महिला के मित्रता पर लागू होता है। यह भी नही की वहाँ उम्र की कोई सीमा हो। पर इस शब्द को ले कर हमारे समाज की मानिसकता काफी खराब है। और आज वेलेन्टाइन डे पर इस शब्द को किसी विशेष दल वालो ने खुल कर विरोध किया है क्योंकि यह भारत का नही है।
पर इसी शब्द को भारत के धर्म गुरु कोई और नाम दे कर बुलाते है तो वह शुद्ध और पवित्र हो जाता है। उसके बाद एक नही सौ सौ महिलाओ को प्रसाद देने के नाम पर उनका शरीरी शोषण उनकी मर्जी के खिलाफ हो फिर भी वह पवित्र ही होता है।
यह सोचने और विचार करने की जरूरत है कि हम जिस समाज मे रहते है वहाँ शब्दो और भेष भूषा के आधार पर ही सब कुछ तय किया जाता है। उसके ज्ञान के आधार पर कुछ भी तय नही होता।मतलब साफ है कि भारत की सांस्कृतिक को दिखावे के लिए तोड़ा जा रहा है और यह के रिश्तों में जो मिठास है उसे धर्म और पाखंडियों ने अपने उपभोग के लिए उन रिश्तों का बलात्कार किया है। और ऐसे बीज को जन्म दिया है जिसे नष्ट करना भारत को सदियों लगेगा। क्योकि यह शिक्षा का नही धर्म राज है। यहाँ ज्ञान का नही धर्म का पूजा होता है और ज्ञानकुम्भ के बजाए धर्मकुम्भ पर करोड़ो खर्च किये जाते है।

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