सच

सच अब भी अपनी परछाई बनाए हुए है।
जो होता है वो दिखता नहीं 
और जो दिखता है वो होता नहीं।।
जो महफ़िल में होते हुए भी अकेले है
और अकेले रहते हुए भी महफ़िल है।
जादू तो सच का है, 
जो पास हो कर भी दिखता नहीं
और जो दिखता है वो पास नहीं
- ओंकार