मेरे शहर में
मेरे शहर में होता है आंसुओ की खेती।
जहाँ हर वर्ष उगते है करोडो रूपये
हाँ मेरे शहर में
मेरे शहर में आसुंओ का लगता है बाज़ार उन जंगलों में,
जहाँ जुटते है सिर्फ बेचने वाले और सिर्फ खरीदने वाले।
हाँ मेरे शहर में
मेरे शहर में चलता है आंसुओ पर करोड़ो की परियोजना,
जो उन आंसुओं की कहनीं लिख कर बेचते है विदेशी बाज़ार में।
जहाँ उन्हें इन आंसुओ की करोड़ो की कीमत मिलती है।
हाँ मेरे शहर में
मेरे शहर में आंसुओ को, तस्कर कहा जाता है
उन पर चलता है पुलिस का डंडा और सरकारी रजिस्टर में दर्ज होता है
उन आंसुओ पर मुकदमा।
हाँ मेरे शहर में
मेरे शहर के नेता इन आंसुओं पर वोट लेते है
हर बार की तरह उन आसुंओ को बेच देते है चुनावी गलियों में ।
कुछ नेता उन्ही आंसुओ से माला माल हो रहे है
हाँ मेरे शहर में...
- ओंकार
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