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हमारा समाज विभिन्न विचारधारा के मेल से बना है और उस समाज को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए कानून बने है सोचिये अगर कानून नहीं होता तो आज हमारा समाज कहाँ होता ? आज देश के लोकतंत्र में हर नागरिक को मौलिक अधिकार दिए गए है और उन मौलिक अधिकारों के बिच संगठन, पद, प्रतिष्ठा एक अलग महत्त्व रखता है| और यही पद प्रतिष्ठा इन्सान को अलग बनता है|  विगत दिनों कोडरमा जिला के डोमचांच प्रखंड में कोडरमा के वरिष्ट समाज सेवी रहे प्रदीप सिंह जी को कोडरमा कांग्रेस डोमचांच प्रखंड का प्रखंड अध्यक्ष बनाया गया है| जिन्हने इन्हें यह पद दिया है वह  काफी गंभीर सोच से इस पद को दिया है जो वास्तव में एक प्रतिष्टित और जिम्मेदारी वाला पद है पर पद की गरिमा और उसका सम्मान तभी कायम रहता है जब व्यक्ति योग्य और मजबूत इक्षाशक्ति वाला हो, और वह जो निर्णय ले वह जनमानस के लिए उपयोगी सिद्ध हो, इस बात का पूर्व ज्ञान पद देने वालो के बिच भी होंना चाहिए परन्तु स्थिति विपरीत है|

हुआ यह की जैस ही पद की घोषणा हुई घंटा भर भी वक्त नहीं बिता और लोगो के विरोध के स्वर फूट पड़े कोडरमा कांग्रेस के वाट्सएप ग्रुप में विरोध के बड़े बड़े स्वर फूट पड़े अल्पसंख्यक कोडरमा कांग्रेस वाट्स एप ग्रुप में लिखे शब्द इस बात के प्रमाण बने है की पद धरी ने क्या क्या किये है| 



जिससे श्री सिंह के कई कारनामे उजागर होने लगे उन कारनामो के बीच फसे पदधारी की नैतिक जिम्मेवारी भी सवालों के घेरे में खड़े हो गए|

अब पद मिल गया है तो उसकी नैतिक जिम्मेवारी की बात आती है तो यह आना लाजमी है कि डोमचांच प्रखंड में सबसे बड़े और प्रतिष्ठित विद्यालयों में सुमार माननीय प्रदीप सिंह जी का विद्यालय ज्ञान सरोवर पब्लिक स्कूल में शिक्षा का अधिकार कानून 2009 का पालन नहीं हो रहा है| जो उनका निजी विद्यालय है और वह उसके चेयरमैन के पद पर विराजमान है| अब वह कांग्रेस प्रखंड कमिटी के मुखिया होने के नाते अपने नैतिक जिम्मेवारी के तहत उन्हें यह घोषणा कर ही देना चाहिए कि हमारा विद्यालय 25 प्रतिशत गरीब बच्चो को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देगा| वही कायदे से सरकार की 16 एकड़ से अधिक भूमि पर कब्ज़ा कर कुंडली मारे बैठे श्री शिंह की यह भी नैतिक जिम्मेवारी बन रही है की उक्त भूमि को सरकार को सुपुर्द कर दे| इसके अलावे कोडरमा कांग्रेस की भूमि जिसे गाँधी मैदान के नाम से जाना जाता है उसे रेंट पर लगाने के लिए वसूली गई राशि उक्त गरीब को लौटा दे | साथ ही एक परिवार से भूमि देने के नाम पर 5 लाख से अधिक की वसूली कर लेने के 2 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें जमीन रजिस्ट्रेशन नहीं करना इत्यादि कई मामलो से घिरे पड़े माननीय सिंह जी अब मोह माया त्याग कर समाज के बिच अपने नैतिक जिम्मेवारियो का निर्वाह करना जरुरी मालूम होता है|

परन्तु स्थति विपरित है माननीय श्री सिंह ने वर्षो काग्रेस पार्टी के नाम पर अपने पद और पवार का गलत उपयोग किया है जिसके आड़ में उन्होंने डोमचांच में बहुकिमती 16 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध तरीके से धीरे धीरे ही सही चारो तरफ से घेर कर अपने आब्जे में ले लिए है| इस मामले में जब स्थानीय युवाओं में आवाज उठाया तो उन्हें फर्जी केस में अपने ही परिवार के सदस्य का उपयोग कर फसा दिया गया| सरकारी भूमि पर कब्ज़ा कर ज्ञान सरोवर पब्लिक स्कूल का निर्माण कार्य किया गया है| सरकारी नापी में इस बात की पुष्टि होने के बाद भी उस भूमि पर कोई कार्यवाहीं नहीं होना इस बात को साफ दर्शाता है की यह कांग्रेस के आड़ में और अपने पहुच का सीधा फायदा उठाया गया है| इन्होने अपने पद को और सुप्रशिद्ध करने के लिए झारखण्ड अधिविधि परिषद् रांची को यह पत्र लिख कर बताए है की हमने डोमचांच इंटर कॉलेज को भूमि दान दिया है| परन्तु इंटर कॉलेज डोमचांच द्वारा दिए एक सुचना में उन्होंने बताया है कि हमें कोई भूमि दान में नहीं मिला है| इतना ही नहीं श्री सिंह के द्वारा अपने ही पडोसी रहे एक गरीब परिवार के घर आने जाने वाले रस्ते को जबरन बंद करने का उल्लेखनीय कार्य किया है|

इस तरह के गरीब कल्याण में होने वाले उल्लेखीय कार्य के लिए श्री प्रदीप सिंह जी को डोमचांच प्रखंड कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनाने के लिए बहुत बहुत बधाई और सम्मान तो मिलना चाहिए जो उनका नैतिक हक भी है| उम्मीद है की उन्हें जो जिम्मेवारी मिली है वह उसमे निपुण साबित होंगे और प्रखंड का नाम रौशन करेंगे|

आलेख : एडमिन ब्लॉगर